रविवार, 3 मई 2020

डॉ. मंजु सिंह 'मरालिका' की कविताएँ


डॉ. मंजु सिंह 'मरालिका' की कविताएँ

हे प्रलयंकर !

हे प्रलयंकर ! फिर एक बार विषपान करो,
मानवता की रक्षा हित कोरोना संधान करो।

हर शहर गांव गलियां और चौबारे,
सब सूने और सहमे सहमे दीख रहे।
घर में कई दिनों से कैद हुए बच्चे,
बाहर जाने दो कहकर चीख रहे।
भूलन ने चौके में जाकर देखा तो,
बस दो टाइम का ही राशन है।
सोच रहा है आगे का कैसे करे जुगाड़।
ऐसे लाचारों की खातिर कोरोना पर वार करो !

हे प्रलयंकर ! फिर एक बार विषपान करो,
मानवता की रक्षा हित कोरोना संधान करो !

घर की दहलीजों के अंदर रहकर ,
मानवता के स्वास्थ्य और सुरक्षा हित।
कैसे भी हम टाल सकें यह मुश्किल,
इस हेतु दवा, दुआ, दिशा और उपचार ढूंढ़ते।
एकाग्रचित्त हो प्रभु तव चरणों में ध्यान लगा।
सारे देश को निगल जाने की नीयत से ,
कोरोना रूपी संकट है सुरसा सा मुंह फैलाए।
प्रभु खोल तीसरा नेत्र इसे अब भस्म करो !

हे प्रलयंकर ! फिर एक बार विषपान करो,
मानवता की रक्षा हित कोरोना संहार करो !

चीन ने मदांध हो जी भर मनमानी की,
ईर्ष्या द्वेष के कुत्सित भावों से प्रेरित हो।
गलित कृत्य कर मूर्खों सी नादानी की,
उसके कारण मानवता संकट ग्रस्त हुई।
खुशहाल जिंदगी पर कोरोना काल बन मंडराता,
इस अप्रत्याशित संकट से सब रहे कराह।
सजल नयन हो मन ही मन भरते आह,
व्यथित जनों के उर में उम्मीदों की किरण भरो !

हे प्रलयंकर ! फिर एक बार विषपान करो,
मानवता की रक्षा हित कोरोना संहार करो !
*****
खुशियों की उजली सुबह

हे ! भारत मां के सपूतों
माना कि तुमने युद्ध के मैदान में
निडर भाव से
प्राणों को हथेली पर रख
लड़े हैं अनेकों युद्ध
हर बार धर्म विजयी रहा
त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने
अधर्मी रावण को धूल चटाई थी
उनके सेवक हनुमान ने
सोने की लंका खाक में मिलायी थी
याद करो !
महाभारत का वह कठिन युद्ध
जब कुरुक्षेत्र के मैदान में
धर्म पथ के पथी पांडवों ने
धूर्त कौरवों को किया था पराजित
पुनः धर्म हुआ था प्रतिष्ठित
इसी तरह श्री कृष्ण ने
अत्याचारी कंस और शिशुपाल का
किया था वध
क्योंकि उन्होंने पार कर दी थी
गलतियों की हद
हर विजय के साथ
धर्म गर्व से मुस्कुराया था
अधर्म ने शर्म से सिर झुकाया था
स्थितियां अलग हैं
आज का यह युद्ध
धर्म और अधर्म
अत्याचारी और सदाचारी
वैचारिक - वैभिन्य
अपने- पराए
अधिकार और कर्तव्य
शोषक और शोषित के बीच का नहीं
यह युद्ध जीवन और मृत्यु के बीच है
जो खुले मैदान में
अस्त्र शस्त्रों से नहीं
घरों के अंदर छिपकर शांति, बुद्धि कौशल,
स्वच्छता, जागरूकता और एक दूसरे से
दूरी बनाकर लड़ना है
मुझे विश्वास है कि जिस तरह
सतत प्रयास से सावित्री
अपने पति सत्यवान को यमद्वार से
वापस लौटा लाई थी
उसी तरह तुम भी
देश के मुखिया द्वारा निर्देशित
लक्ष्मण- रेखा के अंदर रहकर
मानवता पर मौत के रूप में मंडरा रहे
इस विषैले वाइरस को हराओगे
अटल विश्वास, समझदारी और जिजीविषा से
दुख, सन्नाटे और खौफ के मंजर को चीरकर
आने वाली खुशियों की
उजली सुबह देख पाओगे
गर्व से विजयोत्सव मनाओगे !
*****
कोरोना

सूखी खांसी तेज ज्वर, औे रुकती हो सांस।
बिना बिलंब के जाइए, कुशल डॉक्टर पास।।1
कोरोना के कहर से, परेशान सब लोग।
दुनियां के हर देश में, फ़ैल रहा यह रोग।।2
गलती सारी चीन की, भुगत रहे सब देश।
कोरोना की मार से, मुक्त करो देवेश।।3
कोरोना का वायरस, बना गले की फांस।
शाकाहारी है सही, त्यागो मछली मांस।4
आंखों में आंसू भरे, विश्व देखता राह।।
कोरोना को भगा दो, प्रभु इतनी सी चाह।।5
कोरोना से मुक्ति हित , कर करबद्ध प्रणाम।
स्वच्छता से होगा सदा, इसका काम तमाम ।6
हर मानव भयभीत सा, करता करुण पुकार।
कोरोना संहार हित, प्रभु फिर लो अवतार।।7
ठंडा भोजन मत करो, करो गरारा रोज़।
जल्दी ही हो जाएगी, टीके की भी खोज।।8
बीमारी से मत डरो, करो उचित उपचार।।
बचाव की तरकीब का, जमकर करो प्रचार।।9
संकट में है विश्व अब, उड़ी हुई है नींद।
कोरोना कैसे भगे, तलाश रहा उम्मीद।।10
कूड़ा कचरा फेंक दो, साफ़ रखो घर द्वार।
कोरोना के कहर से, तब पाओगे पार ।।11
रहो भीड़ से दूर तुम, हरदम पहनो मास्क।
कोरोना को भगाकर,कर दो पूरा टास्क।।12
आंख नाक मुंह ना छुएं, धुलें सदा ही हाथ।
अग्रज जन के सामने, झुका लीजिए माथ।।13
वस्त्र सुखाएं धूप में, पिएं न ठंडा नीर।
कोरोना डरकर भगे, होवे स्वस्थ शरीर।।14
कोरोना ने कर दिया, बुरा विश्व का हाल।
कुछ ऐसा कर दो प्रभु, सब होवें खुशहाल।।15
*****
तुम विजय अवश्य ही पाओगे ।

तुम विजय अवश्य ही पाओगे ।
मानवता को खुशहाल बनाओगे।।
हे भारत मां के सजग पहरुओं,
मत रुकना, मत थकना,भीत न होना।
इस मुश्किल क्षण में मत धीरज खोना।
स्थितियों के अनुरूप प्रयत्न कर,
निश्चय ही वांछित लक्ष्य पा जाओगे।
तुम विजय अवश्य ही पाओगे।
मानवता को खुशहाल बनाओगे।।
मानवता पर विषधर सा मंडराता,
यह संकट अवश्य ही टल जाएगा।
उम्मीदों का दिनकर खुश हो मुस्काएगा।
सामर्थ्य और समझदारी के संयोजन से,
संक्रमण रूप सुरसा को अवश्य हराओगे।
तुम विजय अवश्य ही पाओगे।
मानवता को खुशहाल बनाओगे।।
राष्ट्र- सुरक्षा हित मोदी जी के महायज्ञ में,
आओ हम सब मिलकर आहुति डालें ।
एकजुट हो प्राणों पर मंडराता संकट टालें।
ले हृदय विजय विश्वास बढ़ो लक्ष्य की ओर,
भारत के माथे पर तुम चंदन तिलक लगाओगे।
तुम विजय अवश्य ही पाओगे।
मानवता को खुशहाल बनाओगे।।
*****
कोरोना का कर दो संहार नाथ ।।

कर दो जग पर उपकार नाथ।
कोरोना का कर दो संहार नाथ ।।
जग पर आई इस विपदा को,
निज संधानों से टालो प्रभु।
इस महा विषैले कीड़े का,
संहार तुरत कर डालो प्रभु।
अखिल विश्व किंकर्तव्यविमूढ़ सा,
करता है करुण पुकार नाथ।
कर दो जग पर उपकार नाथ।
कोरोना का कर दो संहार नाथ।।
भारत मां निज संतानों का दुख लख,
सिसक सिसक कर रोती है।
दशों दिशाएं यह दृश्य देख,
हो व्याकुल धीरज खोती हैं।
प्रभु तुमने हर संकट की बेला में,
निज भक्तों का किया उद्धार नाथ।
कर दो जग पर उपकार नाथ।
कोरोना का कर दो संहार नाथ।।
माना कि मानव जाति ने मनमानी की,
स्वार्थ हेतु पर्यावरण को दिया कष्ट।
निरंतर आघातों से आहत प्रकृति,
आज विश्व से हो गई रूष्ट।
गलती के प्रति नतमस्तक जग को,
दे दो निरोगी होने का उपहार नाथ।
कर दो जग पर उपकार नाथ।
कोरोना का कर दो संहार नाथ।।
हम भारतवासी संकल्प उठाते,
बात राष्ट्र मुखिया की हम मानेंगे।
इक्कीस दिनों तक निर्देशित
लक्ष्मण रेखा को ना लाघेंगे ।
दे दो संबल निज कृपा दृष्टि का,
इस विषाणु पर पा जाएं विजय नाथ।
कर दो जग पर उपकार नाथ।
कोरोना का कर दो संहार नाथ।।

- डॉ. मंजु सिंह 'मरालिका'



डॉ. मंजु सिंह 'मरालिका' - जन्म-तिथि - 02-03-1976, शिक्षा - एम. ए. (हिन्दी, संस्कृत), बी. एड., नेट, पी. एच. डी., पुरस्कार - बीस से अधिक समाचार पत्रों में रचनाएं प्रकाशित सृजन हेतु सम्मान पत्र और पुरस्कार प्राप्त, प्रकाशित पुस्तकें - साहित्य की अनमोल धरोहर, 150 काव्य के अनमोल सितारे (सांझा संग्रह), आईआईटी कानपुर के वार्षिक कार्यक्रम अंतराग्नि के हिंदी इवेंट में निर्णायक की भूमिका भी निभाई, वर्तमान में श्री देशराज नारंग दयानंद इंटर कॉलेज, वाल्टर गंज (जिला- बस्ती, उत्तर प्रदेश) में शिक्षिका।

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