शनिवार, 2 मई 2020

राजश्री गोस्वामी की कविताएँ


राजश्री गोस्वामी की कविताएँ

कोरोना के लिए अभिव्यक्ति
एक अच्छी, साधारण एवं सरल सोच - हम सभी के लिए

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1.
देश, समाज और अपनी रक्षा के लिए,
घर पर ही रहकर काम करो,
प्रभात में प्रभु का नाम लेकर,
घर की साफ़-सफाई, स्नान करो,
पूजा अर्चन वंदन करो,
पठन पाठन, नई योजना, बालकों की पढ़ाई देखभाल करो !

आराम से नए विचारों को व्यक्त करो,
हम सभी की भलाई के लिए इतना अवश्य करो,
इस कोरोना के कहर का अंत करो, अंत करो, अंत करो !
(24/3/2020)
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2.
कोरोना प्रकोप ने माँ धरती को विचलित कर दिया,
सभी को घर में रहने का आदेश दिया,
शोरगुल हलचल से दुनिया व्याकुल हुई,
इसी कारण लॉक डाउन का सन्देश दिया !
(26/3/2020)
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3.
समय अभी कठिन है,
संयम संकल्प की जरुरत है,
करना नहीं है पलायन,
यहीं होगी व्यवस्था अन्न धन,
कहीं जाने से न मिलेगा समाधान,
घर पर ही रहकर करें विधान !
(29/3/2020)
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4.
आस्था का दीपक

रात के दीपोत्सव ने हर घर को
दीपावली का आभास दिया !
तन-मन को उल्लसित कर दिया,
मन में एक नयी ऊर्जा का उदय हुआ !
एक आशा और विश्वास हुआ,
इस कैरोना के भय का जैसे नाश हुआ !
हर दीये ने शुभ सन्देश दिया,
संगम साधना का पाठ दिया !
सेवाकर्मी जो रात-दिन तत्पर हैं,
रहें सुखी यह आशीर्वाद दिया !
(6/4/2020)
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- राजश्री गोस्वामी
(एक माँ, नानी और दादी)


राजश्री गोस्वामी - जन्म जयपुर के एक मध्यमवर्गीय धार्मिक - सांस्कृतिक सरल ब्राह्मण परिवार में। पिता आचार्य - पुजारी - शिक्षक। दो पुत्र और दो पुत्रियॉं - सभी का सुव्यवस्थित जीवन। शिक्षा - स्नातक। सामयिक परिस्थितियों में लेखन पुनः सक्रिय। वैश्विक महामारी से उत्पन्न लॉकडाउन ने तन से गृह-बद्ध अवश्य किया, पर मन की उन्मुक्तता हर रोज लघु काव्य के रूप में प्रकट होने लगी है। पतिदेव बृजेन्द्र गोस्वामी के साहचर्य, सहयोग एवं प्रेरणा से युक्त तुष्ट-संतुष्ट-परिपुष्ट व्यक्तित्व और वरिष्ठ नागरिक। जयपुर में निवास।

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